
बिलासपुर। जर्जर दीवारें कई जगहों से ढह चुकी हैं। दीवारों के साथ-साथ छत्त में भी दरारें पड़ गई हैं। बारिश होने पर पानी टपकता है। यह हाल किसी गरीब की झोंपड़ी का नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय स्थित खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बीईईओ) कार्यालय की इमारत का है। हालांकि इसे असुरक्षित घोषित किया जा चुका है, लेकिन कोई वैकल्पिक ठिकाना न मिलने के कारण अधिकारियों व कर्मचारियाें को खौफ के साये में काम करना पड़ रहा है।
शहर के रौड़ा सेक्टर में दशकों पूर्व बने बीईईओ कार्यालय भवन की हालत काफी खस्ता हो चुकी है। इस कार्यालय में करीब 20 कर्मचारी व अधिकारी कार्यरत हैं। वहीं इसके अंतर्गत सदर खंड की 153 प्राथमिक पाठशालाएं भी हैं। इन स्कूलों में करीब 400 अध्यापकों के साथ ही 152 जलवाहक व 275 मिड-डे मील कर्मी कार्यरत हैं। इन स्कूलों के साथ ही स्टाफ का सारा रिकार्ड भी इसी कार्यालय में मौजूद है। बरसात के दौरान छत्त से टपकता पानी इस रिकार्ड को भी खराब कर रहा है।
लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त ने गत 26 मार्च को इसे असुरक्षित घोषित कर दिया था। इस पर वैकल्पिक भवन के लिए सरकार, प्रशासन और विभाग से कई बार आग्रह किया गया, लेकिन स्थिति जस की तस है। इसके चलते स्टाफ को मजबूरन जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ रहा है। यदि जर्जर इमारत अचानक ढह गई तो दुखद हादसा होना निश्चित है।
प्राथमिक शिक्षक संघ की सदर खंड इकाई के अध्यक्ष बसंत ठाकुर का कहना है कि बीईईओ कार्यालय भवन कभी भी ढह सकता है। बेहतर होगा कि समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं। उन्हाेंने बीईईओ आफिस को तहसील कार्यालय के पुराने भवन में शिफ्ट करने अथवा किसी अन्य स्थान पर पांच कमरे मुहैया कराने की मांग की है। उधर, बीईईओ बनारसी दास वर्मा ने माना कि भवन को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि स्टाफ के लिए वैकल्पिक व्यवस्था न होने तक भवन को नहीं गिराया जा सकता। इसके लिए आग्रह किया गया है, लेकिन फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है।
